Full Product Description
हो’ दिसुम हो’ होनको किताब – 1 | Ho’ Disum Ho’ Honko Kitab – 1
धनुर सिंह पुरती द्वारा लिखित यह पुस्तक हो भाषा के अध्ययन और उसके साहित्यिक विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह श्रृंखला का पहला भाग है और लेखक ने हो भाषा में व्यावहारिक जीवन, परंपराओं एवं प्रथाओं से संबंधित सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
पुस्तक की भूमिका में लेखक बताते हैं कि यह तीसरा संस्करण है, जिसमें पहले की छोटी-मोटी गलतियों को सुधारने तथा पढ़ने की सुविधा के लिए संयुक्त क्रियाओं और संयुक्त शब्दों को अलग-अलग चिह्नित करने जैसे बदलाव किए गए हैं। भूमिका में हो भाषा की सरलता, मधुरता और साहित्यिक रूप को विकसित करने के प्रयास का भी उल्लेख है।
लेखक हो समाज की भाषा, जीवनशैली और परंपराओं को सुरक्षित रखने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के महत्व पर जोर देते हैं। यह पुस्तक हो भाषा में पढ़ने का अभ्यास करने और हो समाज के सांस्कृतिक परिवेश को समझने के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करती है।
यह पुस्तक विशेष रूप से उन पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है जो हो भाषा सीखना चाहते हैं, अपनी मातृभाषा में पढ़ने का अभ्यास करना चाहते हैं या झारखंड की आदिवासी भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत में रुचि रखते हैं।
Book Details
| Detail | Information |
|---|---|
| Book Name | हो’ दिसुम हो’ होनको किताब – 1 |
| English Title | Ho’ Disum Ho’ Honko Kitab – 1 |
| Subject | Ho Language / Language Learning |
| Content | हो भाषा, पढ़ने का अभ्यास, व्यावहारिक जीवन एवं परंपराएँ |
| Language | हो |
| Author | धनुर सिंह पुरती (Dhanur Singh Purti) |
| Book Type | Tribal Language / Regional Language |
| Publisher | Prithvi Prakashan |
| Publisher Location | New Delhi |
| ISBN | 978-81-86845-40-2 |
| MRP | ₹150 |
| Edition | तीसरा संस्करण |








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