Full Product Description
झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और साहित्य को करीब से जानने के लिए अखड़ा (मुंडारी कविता) एक महत्वपूर्ण काव्य-संग्रह है। इस पुस्तक के लेखक मान सिंह पाहन हैं। इसमें मुंडारी भाषा में रचित कविताएँ संकलित हैं, जो स्थानीय भाषा और साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी हैं।
पुस्तक की विषय-सूची में विभिन्न कविता-खंड शामिल हैं, जैसे जदुर खण्ड, ओर जदुर खण्ड, गेना खण्ड, चिटिद खण्ड, मागे (जागर) खण्ड, ओर मागे खण्ड, करम खण्ड और सोहराई खण्ड। ये शीर्षक मुंडारी कविता की विविधता को दर्शाते हैं।
यदि आप Mundari Poetry, Tribal Literature और Jharkhand’s Regional Languages में रुचि रखते हैं, तो यह पुस्तक आपके व्यक्तिगत संग्रह, पुस्तकालय या अध्ययन के लिए एक अच्छा विकल्प है।
Book Details
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पुस्तक का नाम | अखड़ा |
| उपशीर्षक | मुंडारी कविता |
| लेखक | मान सिंह पाहन |
| प्रकाशक | Prithvi Prakashan, New Delhi |
| भाषा | मुंडारी |
| ISBN | 978-81-86845-73-9 |
| MRP | ₹150 |








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