Full Product Description
झारखंड की जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक लोकगीतों की समृद्ध विरासत को जानने के लिए जव सुसुन अकड़ा (मुंडारी लोकगीत संग्रह) एक महत्वपूर्ण पुस्तक है। इस पुस्तक का संपादन बिरसा ओड़ेया और सुखराम मुंडा ने किया है तथा इसका प्रकाशन Jharkhand Jharokha द्वारा किया गया है।
मुंडारी लोकगीत (Mundari Folk Songs) आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और सामुदायिक जीवन की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति हैं। यह संग्रह मुंडारी भाषा और लोक-साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है। झारखंड की स्थानीय भाषाओं और आदिवासी साहित्य को पढ़ने, समझने और संरक्षित करने की दिशा में ऐसी पुस्तकें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
यदि आप Mundari literature, tribal folk songs और Jharkhand’s cultural heritage में रुचि रखते हैं, तो यह पुस्तक आपके संग्रह के लिए एक अच्छा विकल्प है।
Book Details
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पुस्तक का नाम | जव सुसुन अकड़ा |
| पुस्तक का प्रकार | मुंडारी लोकगीत संग्रह |
| संपादक | बिरसा ओड़ेया एवं सुखराम मुंडा |
| प्रकाशक | Jharkhand Jharokha |
| भाषा | मुंडारी लोकगीत संग्रह; हिंदी अनुवाद की उपलब्धता की पुष्टि नहीं है |
| ISBN | 978-93-81720-97-4 |
| MRP | ₹300 |








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